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Movie : Aaye din bahar ke (1966)
Singer : Mohd. Rafi
Lyrics : Anand Bakshi
Music : Laxmikant Pyrelal

Song is meant for carrying the emotions of love and related things like separations etc. But I have never come across with any such piece of work which is full of curse. If you read each sher you will understand to intensity of hatred of the avower.

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Mere dil se sitamgar tune achhi dillagi ki hai,
ke banke dost apne dostoson se dushmani ki hai.

Mere dushman tu meri dosti ko tarse,
muje gam denewale tu khushi ko tarse.

Tu phul bane patjad ka tuj pe bahar na aaye kabhi,
meri hi tu tadpe tujko karar na aaye kabhi.

Jiye tu is terh ke zindgi ko tarse.
mere dushman tu meri dosti ko tarse.

Itna to asar kar jaye meri wafaon o bewafa,
ek roz tuje yaad aye apni zaffanon o bewafa.

pashemaaon ke roye tun hansi ko tarse,
mere dushman tu meri dosti ko tarse.

Tere gulshan se jyada viran koi viranaa na ho,
is duniya me koi tera apna to ho kya begana na ho.

Kisi ka pyar kya tu berukhi ko tarse,
mere dushman tu meri dosti ko tarse.
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मेरे दिल से सितमगर तुने अच्छी दिल्लगी कि है,
के बनके दोस्त अपने दोस्तोसों से दुश्मनी कि है.

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे,
मुजे गम देनेवाले तू ख़ुशी को तरसे.

तू फूल बने पतझड का तुज पे बाहर न आये कभी,
मेरी ही तरह तुं तडपे तुज़को करार न आये कभी.

जिए तू इस तेरह के जिंदगी को तरसे.
मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे.

इतना तो असर कर जाये मेरी वफाओं ओ बेवफा,
एक रोज़ तुजे याद आये अपनी ज़फांअए ओ बेवफा.

पशेमाओं के रोये तुं हंसी को तरसे,
मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे.

तेरे गुलशन से जियादा विरान कोई विराना न हो,
इस दुनिया मी कोई तेरा अपना तो हो क्या बेगाना न हो.

किसी का प्यार क्या तू बेरुखी को तरसे,
मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे.
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पशेमाओं/pashemaaon = repentant, ashamed. (Thanks, Dost)